जुनून
मेरे जीवन के कुछ अन-कहे पल !!
शनिवार, १८ अगस्त २००७
दो बदन
हमने देखा उन्हें
दिन में और रात में
मास्जिदों के मिनारों ने देखा उन्हें
मन्दिरों के किवाड़ों ने देखा उन्हें
मयकदे की दरारों ने देखा उन्हें
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Vivek Sharma
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