शनिवार, ९ फरवरी २००८

शीशा ही नही टूटा, अक्स भी टूटा है


जो मेरे शहर मे कुछ रौशनी लाये होंगे,
उन चिरागों ने कई घर भी जलाऐ होंगे !
हाथ यकीनन उनके भी हुए होंगे जख्मी,
जिन्होने कांटे मेरी राहों मे बिछाये होंगे !!

1 टिप्पणियाँ:

rakesh ने कहा…

bahot sundar hai aap ki ye pangtiya sun kar maja aa gya ,janab