गुरुवार, २५ सितम्बर २००८

दुआ

चाहत में किसी का इम्तिहान ना लेना ...

जो निभा ही ना सको वो वादा ना देना ...

जिसे आपके बिन जीने की आदत ही ना हो ...

उसे कभी अकेले जीने की दुआ ना देना ।

2 टिप्पणियाँ:

manvinder bhimber ने कहा…

चाहत में किसी का इम्तिहान ना लेना ...

जो निभा ही ना सको वो वादा ना देना ...

bahut umda

Anwar Qureshi ने कहा…

चाहत में किसी का इम्तिहान ना लेना ...

जो निभा ही ना सको वो वादा ना देना ...

जिसे आपके बिन जीने की आदत ही ना हो ...

उसे कभी अकेले जीने की दुआ ना देना ।


bahut khubsurat likha hai aap ne...