बुधवार, १ अक्तूबर २००८

वो कहते है


वो कहते है मजबूर है हम ,
ना चाहते हुए भी तुमसे दूर है हम ,
चुरा ली उन्होंने धड़कने भी हमारी ,
फिर भी कहते है बेकसूर है हम !
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कुछ रिश्ते अनजाने में हो जाते है ,
पहले दिल, फिर ज़िन्दगी से जुड़ जाते है ,
कहते है उस दौर को दोस्ती ,
जिस में दिल से दिल ना जाने कब जुड़ जाते है !

2 टिप्पणियाँ:

Raviratlami ने कहा…

कहंतें की जगह सही यह है - कहते
उम्मीद है आप बुरा नहीं मानेंगे. :)

वैसे कविता के भाव अच्छे हैं.

MANVINDER BHIMBER ने कहा…

कुछ रिश्ते अनजाने में हो जाते है ,
पहले दिल, फिर ज़िन्दगी से जुड़ जाते है ,
कहते है उस दौर को दोस्ती ,
जिस में दिल से दिल ना जाने कब जुड़ जाते है !
sunder or dil ko cho jaane waale bhaaw hai